धर्म युद्ध
"सत्य, धर्म और न्याय की पुकार"
36 देव धाम: एक दिव्य संकल्प
दुर्गा महारानी सेना सामाजिक संस्थान द्वारा जन-सहयोग से बोकारो (जैना मोड़) के समीप आरालडीह पंचायत क्षेत्र में गरगा एवं जगासूर नदी जोरिया के मध्य एक दिव्य दुर्गा महारानी मंदिर धाम का निर्माण किया गया है। इस पावन स्थल पर शिव बाबा, काली माता, स्वयंभू बजरंगबली सरकार, शनि देव, नाग देवता तथा गंगा माता के भी पवित्र स्थान स्थापित हो चुके हैं।
यहाँ प्रतिदिन प्रातः एवं सायं विधिवत पूजा-अर्चना एवं आरती सम्पन्न होती है। संस्थान से जुड़े संतों एवं गुरुओं के अनुसार, इस धाम में आदि महामाया दुर्गा महारानी एवं विश्वतंत्री माता अपने प्रबल स्वरूप “महादानी सम्पत्ति माई” के रूप में समस्त छत्तीसों देवी-देवताओं के साथ विराजमान हैं। इसी कारण यह स्थल “36 देव धाम” के नाम से विख्यात हो रहा है।
जन-सेवा और समर्पण
संस्थान द्वारा समय-समय पर जन-सहयोग से निःशुल्क चिकित्सा शिविर, भंडारा तथा धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन भी किया जाता है। वर्तमान में दुर्गा महारानी सेना (डीएमएस) से झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों के हजारों सक्रिय सदस्य एवं पदाधिकारी जुड़े हुए हैं।
सेना में शामिल होंअवरोध और अन्याय
अत्यंत खेद के साथ उल्लेख करना पड़ता है कि एक मार्केटिंग कंपनी में मंदिर निर्माण हेतु प्राप्त दानराशि वापस न किए जाने के कारण निर्माण कार्य बाधित हो गया है। साथ ही, इस प्रकरण में एक पुलिस अधिकारी की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होने से जनमानस एवं श्रद्धालुओं में स्वाभाविक आक्रोश उत्पन्न हुआ है।
मार्ग में बाधाएँ
मंदिर मार्ग में अवरोध उत्पन्न करने के उद्देश्य से कांटों-झाड़ियों को फैलाना तथा आसपास की भूमि की खुदाई कर बड़े-बड़े गड्ढे बना दिए गए हैं, जिससे वर्षा ऋतु में गरगा नदी का जल मंदिर परिसर को क्षति पहुँचा सकता है। उल्लेखनीय है कि उक्त भूमि गैर-मजरूआ अथवा वन विभाग के अधीन है।
मानसिक प्रताड़ना
आरोग्य धाम से जुड़े संत एवं गुरु निःस्वार्थ भाव से जन-सेवा के संकल्प में निरंतर संलग्न हैं। ऐसे संतों को डायन प्रथा निवारण अधिनियम, 2001 की आड़ में पुलिस प्रशासन द्वारा पूछताछ के नाम पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाना न केवल अनुचित है, बल्कि समाज की धार्मिक भावनाओं को भी आहत करता है।
न्याय की मांग: राजभवन तक पदयात्रा
इस विषय में न्याय की मांग को लेकर रांची के बूटी मोड़ से राजभवन तक हजारों संतों, गुरुओं एवं श्रद्धालुओं द्वारा पैदल यात्रा कर मुख्यमंत्री महोदय को पत्र एवं ज्ञापन सौंपा गया। तथापि, अभी तक कोई ठोस कार्यवाही न होने से श्रद्धालुओं में निराशा एवं आक्रोश व्याप्त है। विभिन्न बहानों से मंदिर निर्माण कार्य को बार-बार रोका जाना अत्यंत चिंताजनक है।
सड़क से संसद तक
एक व्यापक जनआंदोलन का शंखनाद
DMS India से जुड़े श्रद्धालुओं एवं नागरिकों द्वारा एक व्यापक जनसमूह के रूप में “सड़क से संसद तक” आंदोलन प्रारंभ करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि भविष्य में न केवल इस आरोग्य धाम (36 देव धाम), बल्कि देश के किसी भी मंदिर या धार्मिक स्थल के निर्माण कार्य में अवरोध उत्पन्न करने का दुस्साहस कोई न कर सके।